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भ्रष्टाचार, अन्याय, अत्याचार सहन नहीं होता। नजदीक के लोग कहते हैं कि "लिखने से कुछ नहीं होता…" लेकिन मैं सोचता हूँ कि कुछ न करने से बेहतर है कि "कुछ" किया जाये।
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जोशीले
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